ये बात
थोड़ी अजीब लगती है की मैं अपनी तुलना 7 करोड़ साल नवीन
हिमालय से कर
रहा हूं
.विषय के अनुरूप यह शीर्षक काफी विस्तृत लगता है
. हलाकि यह वास्तविकता के समीप
प्रतीत होता है
.
अभी एक –दो दिन पहले मुझे हिमालय दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ
, हलाकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ
. मैं पहले भी कई बार हिमालय में बसे
कई शहर
देख चूका हूं
. पहले मैं एक पर्यटन विशेषज्ञ बन कर जाता रहा हूं
. इस बार मैं हिमालय दर्शन के लिए एक भिन्न उद्देश्य से गया
. पिछले कई महीनो से मैं विभिन्न कारणों से काफी परेशान रहा इसमें कुछ हमेशा की तरह सामाजिक कारण,
आर्थिक कारण तथा कुछ विशेष व्यक्तिक कारण रहे
. पिछले लगभग 100 दिनों से मैं एक मानसिक रोगी बन कर रह गया . हलाकि किसी व्यक्ति विशेष के कारण ऐसी परिस्थति बनी रही
. खैर जो भी रहा हो
, मुझे हिमालय दर्शन की इच्छा कई दिनों
से हो रही थी,
जो मैंने पूरी कर ही ली.
हिमालय की तुलना अपने आप से करना काफी तुछ
सा काम लगता है
. किन्तु इसका एक बड़ा कारण है
. हिमालय को हमेशा महान
हिमालय कहा
जाता रहा है और वह
है भी
. मैं हिमालय के भूगार्भिग,
भोगोलिक , आर्थिक , सामाजिक , सुरक्षा व् सामरिक दृश्टिकोण से भली भाती परिचित हूं
. किन्तु इस बार मैंने हिमालय को अपनी तुलना में खड़ा पाया
.इस बार हिमालय को मेरे मन ने एक दर्शन के अनुरूप देखा
. हिमालय में पहले से ही धर्म दर्शन मौजूद है.
किन्तु मेरे मन
के भाव ने
हिमालय में जीवन
दर्शन को परिकल्पित
किया. हिमालय साक्षात
अविचल होकर जिस
प्रकार खड़ा है
उससे मुझे एक
नई जीवन दिशा
मिली. हिमालय से प्रकट होने वाली नदिया
हिमालय को काट रही है, पर्वत, पत्थर हमेशा अस्थिर हो कर गिरते रहते है, कही बर्फीली
चोटिया है तो कही दुर्गम रास्ते, कही वन तो कही बंजर. मानव अपने प्रयासों से हिमालय
में लगातार अपनी पहुच बनाने में लगा है किन्तु हिमालय के रहस्य उतने ही गहरा रहे है
. हिमालय का कोई भले ही कितना भी दोहन कर ले किन्तु हिमालय को इस बात की ज़रा भी फ़िक्र नहीं है.
हिमालय जो भी है जैसा भी है वह सबको दिखता
है अपने वास्तविक स्वरुप में.
अब
सवाल ये है
की इससे मैं
कहा जुड़ता हूं ?
मैंने पाया की मैं (हालाकिं यह स्वमं की प्रशंशा करने के समान होगा) जो हिमालय का भौतिक
स्वरुप है वही हालत मेरे मन की है जिसे मैं प्रत्येक स्थिति में अविचल रखने का यत्तन
करता हूं. प्रत्येक बात यहाँ लिख
तो नहीं सकता किन्तु कुछ बातो का ज़िक्र ज़रूर कर सकता हूं. मुझे हिमालय से एक बात सिखने
को मिली की आप जैसे है जो है वैसे ही बने रहे,
लोग आपके बारे मैं क्या सोचते है इसे कोई फर्क नहीं पड़ता. यदि आपका सच किसी को झूठ
लगता है इसमें आपका कोई भी दोष नहीं है. यह बात सामने वाले की सोच पर निर्भर करती है
की उसका मन कितना संदेहपूर्ण है ? मैं भी यही करता हूं. हिमालय की भांति मैं भी शांत
रहने का प्रयत्न करता हूं किन्तु समय आने पर यह आवश्यक है की हिमालय की भांति मुझे
भी रौद्र रूप दिखाना पड़ता है. मुझे अनुभव हुआ की हिमालय की गहराई मन की गहराई के सामान
है जिसे नाप पाना मुश्किल है. यदि कोई रस्सी के एक छोटे टुकड़े से मेरे मन की गहराइयो
को नापने का यत्न कर रहा है तो बेकार है. कई बार कुछ लोग अपने बनाए स्तरों पर मुझे प्रमाणित करने का यत्न करते है जो की मुझे
कई बार परेशान भी करता है और हैरान भी. मेरे कुछ मित्र है जिनकी जीवन शैली काफी ऊँचे वैज्ञानिक स्तर की है वो मुझे प्रमाणित
करने की क्षमता रखते है. ठीक हिमालय के अनुरूप जो मुझे समझने का उच्च वैज्ञानिक दृश्टिकोण
रखते है वही प्रमाणित कर सकते है. मेरे संकल्प हिमालय की चोटियों की भांति ऊँचे है और मुझे उन पर गर्व है.
कुल
मिलाकर हिमालय ने मुझे
नया जीवन स्त्रोत
प्रदान किया. जीवन में
उतार चढ़ाव आते
रहते है किन्तु
हिमालय ने सिखाया
की " खड़ा हिमालय बता रहा है डरो न आँधी पानी में,
खड़े रहो अपने पथ पर सब कठिनाई तूफानी में “
आपके विचारों ने मुझे प्रोत्साहित किया धन्यवाद्
जवाब देंहटाएंआपका आज्ञाकारी शिष्य सुशील
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